Onion Farming Profit in India 2026: 1 Acre Cost, Yield & Income (Hindi)

Onion Farming Profit In India 2026 1 Acre Cost, Yield & Income (Hindi)

भारत में प्याज की खेती से मुनाफ़ा 2026: 1 एकड़ लागत, उपज और आय

1. भूमिका: भारत में प्याज की खेती का महत्व और 2026 का आउटलुक

Onion प्याज भारतीय रसोई का एक अभिन्न अंग है। यह केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और राजनीतिक खबरों में भी अहम भूमिका निभाता है। “प्याज की कीमत” सरकारों को बना भी सकती है और गिरा भी सकती है। भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है, जिसमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। यह फसल लाखों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका का आधार है।

2026 में प्याज की खेती के आउटलुक को कई कारक प्रभावित करेंगे:

  • बढ़ती मांग:जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण के साथ प्याज की मांग लगातार बढ़ रही है।
  • जलवायु परिवर्तन:अनिश्चित मानसून और बेमौसम बारिश या सूखा उत्पादन को प्रभावित कर सकता है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है।
  • निर्यात संभावनाएँ:भारत से बांग्लादेश, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात आदि को निर्यात की गुंजाइश बनी रहती है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में माँग किसानों को अच्छी कीमत दिला सकती है।
  • तकनीकी विकास:ड्रिप सिंचाई, बेहतर भंडारण तकनीक और उन्नत किस्मों का प्रसार लाभ बढ़ाने में मददगार होगा।

इस लेख में, हम 2026 के संदर्भ में1 एकड़ भूमि में प्याज की खेती की विस्तृत लागत, संभावित उपज और आयका विश्लेषण करेंगे, ताकि एक किसान सूचित निर्णय ले सके।

2. प्याज की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ

  • जलवायु:प्याज ठंडे मौसम की फसल है। इसे20°C से 25°Cके बीच तापमान की आवश्यकता होती है। अत्यधिक गर्मी, ठंड या पाला इसके लिए हानिकारक है। रबी सीजन (अक्टूबर-नवंबर में बुआई) प्रमुख मौसम है। खरीफ (मई-जून) और गर्मी (जनवरी-फरवरी) में भी कुछ क्षेत्रों में खेती होती है।
  • मिट्टी:अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी, जिसमें कार्बनिक पदार्थ की मात्रा अच्छी हो, आदर्श मानी जाती है। मिट्टी का pH मान6.0 से 7.5के बीच होना चाहिए।
  • प्रमुख किस्में:
    • रबी के लिए:नासिक लाल, भीमा सुपर, भीमा शक्ति, भीमा लाल, भीमा शुभ्रा (सफेद), पूसा रिद्धि।
    • खरीफ के लिए:भीमा डार्क रेड, अर्का कल्याण, अर्का निकेतन।
    • संकर किस्में:संकर किस्में अधिक उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं, लेकिन बीज लागत अधिक होती है।

3. 1 एकड़ प्याज की खेती में लागत (2026 के अनुमानित दरों पर)

क्रमांकलागत का मद (Cost Head)विवरणअनुमानित लागत (₹)
A. पूर्व-बुआई लागत
1.जुताई/खेत की तैयारीट्रैक्टर से 2-3 जुताई और पाटा लगाना2,500 – 3,500
2.बीज8-10 किलोग्राम (संकर: ₹1500-2500/किग्रा, देसी: ₹500-800/किग्रा)। संकर किस्म ग्रहण12,000 – 18,000
3.नर्सरी तैयारीबीज शोधन, क्यारी बनाना, पॉलीथीन आदि।1,000 – 1,500
4.खाद एवं उर्वरकजैविक खाद: 8-10 टन गोबर की खाद। रासायनिक खाद: NPK (100:50:50 किग्रा प्रति एकड़)। डीएपी, यूरिया, पोटाश।8,000 – 12,000
उप-योग (A)23,500 – 35,000
B. बुआई एवं रोपाई लागत
5.रोपाई का श्रममजदूरों द्वारा नर्सरी से पौध निकालना और मुख्य खेत में रोपाई करना।5,000 – 7,000
6.सिंचाई व्यवस्थाड्रिप इंस्टालेशन (यदि नई लग रही है, तो यह एक बार की लागत है, लेकिन यहाँ परिचालन लागत गिनी गई है)।(इसमें शामिल नहीं)
उप-योग (B)5,000 – 7,000
C. फसल प्रबंधन लागत
7.सिंचाई10-12 सिंचाई (डीजल/बिजली पम्प लागत सहित)। ड्रिप से बचत होगी।6,000 – 9,000
8.निराई-गुड़ाई/खरपतवार नियंत्रण2-3 बार निराई या खरपतवारनाशी दवा।2,000 – 3,000
9.कीट एवं रोग प्रबंधनथ्रिप्स, मैजिक, बैंगनी धब्बा रोग आदि के लिए कीटनाशक/फफूंदनाशक 4-5 छिड़काव।4,000 – 6,000
10.शीर्ष ड्रेसिंग/अन्यरोपाई के 30-45 दिन बाद यूरिया का छिड़काव।1,500 – 2,000
उप-योग (C)13,500 – 20,000
D. कटाई और कटाई के बाद की लागत
11.कटाई/खुदाई का श्रममजदूरों द्वारा प्याज उखाड़ना, छंटाई, ऊपरी पत्तियाँ काटना।4,000 – 6,000
12.परिवहनखेत से घर/बाज़ार तक ढुलाई।2,000 – 3,000
13.भंडारण (यदि आवश्यक हो)अस्थायी भंडारण या गोदाम का किराया (प्रति माह)।1,000 – 2,000
उप-योग (D)7,000 – 11,000
E. अन्य/अप्रत्याशित लागत
14.पूँजी पर ब्याज (यदि ऋण लिया है)6 महीने के लिए कुल लागत का 7-8%।3,500 – 5,500
15.अप्रत्याशित व्यय2,000 – 3,000
उप-योग (E)5,500 – 8,500
1 एकड़ प्याज की खेती की कुल अनुमानित लागत (A+B+C+D+E)₹ 54,500 से ₹ 81,500

नोट: यह लागत पूर्ण रूप से प्रबंधित खेती की है। यदि किसान के पास स्वयं का ट्रैक्टर है, परिवार के सदस्य श्रम में हाथ बंटाते हैं, या जैविक खाद स्वयं बनाते हैं, तो लागत घटकर ₹40,000 – ₹60,000 तक भी आ सकती है।

4. 1 एकड़ से उपज और आय का अनुमान (2026 के अनुमान)

  • औसत उपज:1 एकड़ से प्याज की उपज100 से 250 क्विंटलतक हो सकती है। यह किस्म, मौसम, प्रबंधन और क्षेत्र पर निर्भर करता है।
    • संकर किस्में:180 – 250 क्विंटल/एकड़।
    • उन्नत देसी किस्में:120 – 180 क्विंटल/एकड़।
    • हम एक औसत उपज 150 क्विंटल (15,000 किलोग्राम) मानकर चलते हैं।
  • विक्रय मूल्य (2026 का अनुमान):प्याज का बाजार भाव बेहद अस्थिर होता है। यह10/किग्रा से लेकर ₹50-60/किग्रा या अधिकतक जा सकता है। यह मौसमी आपूर्ति, स्टॉक और मांग पर निर्भर करता है।
    • कम कीमत परिदृश्य:₹15/किग्रा (अधिक उत्पादन के समय)
    • औसत कीमत परिदृश्य:₹25/किग्रा
    • उच्च कीमत परिदृश्य:₹40/किग्रा (कम उत्पादन या मांग अधिक होने पर)

आय गणना (150 क्विंटल = 15,000 किग्रा उपज मानकर):

परिदृश्यप्रति किग्रा मूल्य (₹)कुल आय (₹)कुल लागत (औसत ₹68,000 मानकर)शुद्ध लाभ (₹)
कम कीमत152,25,00068,0001,57,000
औसत कीमत253,75,00068,0003,07,000
उच्च कीमत406,00,00068,0005,32,000

निष्कर्ष: 2026 में, 1 एकड़ प्याज की खेती से किसान को औसतन ₹2.5 से ₹3.5 लाख तक का शुद्ध लाभ प्राप्त होने की संभावना है। अच्छे प्रबंधन और अनुकूल बाजार भाव पर यह और अधिक हो सकता है। हालाँकि, कम कीमत के दौर में भी लाभ की संभावना बनी रहती है।

5. प्याज की खेती से अधिकतम लाभ कैसे प्राप्त करें?

  1. उन्नत किस्मों का चयन:स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार उच्च उपज वाली, रोग प्रतिरोधी संकर या उन्नत किस्में चुनें।
  2. समेकित पोषक प्रबंधन (INM):गोबर की खाद/वर्मीकम्पोस्ट के साथ मृदा परीक्षण के आधार पर ही रासायनिक खादों का प्रयोग करें। इससे लागत कम और गुणवत्ता अच्छी रहेगी।
  3. समेकित कीट प्रबंधन (IPM):नीम के तेल, फेरोमोन ट्रैप, जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें। रसायनों का प्रयोग अंतिम विकल्प के रूप में ही करें।
  4. भंडारण सुविधा का विकास:प्याज की कीमत कटाई के तुरंत बाद सबसे कम होती है।उचित भंडारण(जैसे शुध्द वेंटिलेटेड गोदाम) की सहायता से आप 3-6 महीने तक प्याज सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर भाव मिलने पर बेच सकते हैं।
  5. बाजार संपर्क और जानकारी:स्थानीय APMC मंडी, किसान उत्पादक संगठन (FPO), और ई-नाम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ें। बाजार भाव की समय-समय पर जानकारी लेते रहें।

6. जोखिम और चुनौतियाँ तथा उनका समाधान

  • कीमतों में अस्थिरता:यह सबसे बड़ी चुनौती है।
    • समाधान:भंडारण करें, FPO के माध्यम से सामूहिक विपणन करें, बीज उत्पादन जैसे विकल्प तलाशें।
  • जलवायु जोखिम:अतिवृष्टि, सूखा, अनियमित मौसम।
    • समाधान:बीमा (पीएमएफबीवाई) अवश्य कराएँ, जल संरक्षण तकनीकें अपनाएँ, मौसम पूर्वानुमान पर नज़र रखें।
  • रोग एवं कीट:थ्रिप्स, बैंगनी धब्बा रोग।
    • समाधान:IPM को अपनाएँ, रोग रोधी किस्में बोएँ, फसल चक्र अपनाएँ।
  • भंडारण में हानि:सड़न, अंकुरण।
    • समाधान:अच्छी हवादार जगह पर भंडारण, उपचारित कर रखें।

7. सरकारी योजनाएँ और सब्सिडी

केंद्र और राज्य सरकारें प्याज उत्पादन और भंडारण को प्रोत्साहित करती हैं।

  • पीएम किसान सम्मान निधि:आय सहायता के रूप में ₹6000/वर्ष।
  • परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY):जैविक खेती के लिए सहायता।
  • ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई पर सब्सिडी:अधिकांश राज्यों में 50-80% अनुदान।
  • कृषि यंत्रीकरण पर सब्सिडी:हैपीसीडर, रोपाई यंत्र आदि पर।
  • भंडारण गोदाम निर्माण पर अनुदान:कृषि मंत्रालय की योजनाओं के तहत।
  • फसल बीमा (पीएमएफबीवाई):प्रीमियम का केवल 2% किसान को देना होता है।

स्थानीय कृषि विभाग से इन योजनाओं की जानकारी लें।

8. निष्कर्ष: क्या 2026 में प्याज की खेती लाभदायक है?

हाँ, यदि वैज्ञानिक और बाजार-उन्मुख तरीके से की जाए, तो 2026 में भी प्याज की खेती एक लाभदायक उद्यम साबित हो सकती है। हालाँकि, यह जोखिम रहित व्यवसाय नहीं है। सफलता की कुंजी लागत प्रबंधन, उत्पादकता बढ़ाने और विपणन रणनीति में है। आधुनिक तकनीकों को अपनाकर, सरकारी सहायता का लाभ उठाकर और बाजार के अनुरूप फसल प्रबंधन करके किसान प्याज की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप “अधिक उपज, कम लागत, बेहतर भाव” के सिद्धांत पर काम करें।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (5 FAQs)

1. प्रश्न: क्या मैं 1 एकड़ से कम जमीन (जैसे 0.5 एकड़) में प्याज की खेती शुरू कर सकता हूँ? क्या यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य है?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल। छोटी जोत में प्याज की खेती शुरू करना एक बेहतरीन तरीका है। इससे आप कम जोखिम में तकनीक सीख सकते हैं। आर्थिक व्यवहार्यता के लिए, गहन खेती (Intensive Farming) और अंतरवर्तीय खेती (Intercropping) पर ध्यान दें। प्याज के साथ मूली, गाजर या हरी पत्तेदार सब्जियाँ लगाकर आप प्रति इकाई क्षेत्रफल से आय बढ़ा सकते हैं। ड्रिप इरीगेशन जैसी कुशल तकनीकों से छोटे क्षेत्र में भी अच्छा मुनाफा संभव है।

2. प्रश्न: प्याज की खेती में सबसे ज्यादा खर्चा किस चीज पर होता है और मैं उसे कैसे कम कर सकता हूँ?
उत्तर: प्याज की खेती में बीज, खाद/उर्वरक और श्रम पर सबसे अधिक खर्च आता है।

  • बीज पर खर्च कम करने के लिए:देसी/उन्नत किस्मों के बीज स्वयं तैयार करने का प्रयास करें (हालाँकि संकर किस्मों के लिए यह मुश्किल है)। विश्वसनीय स्रोत से ही बीज खरीदें ताकि अंकुरण अच्छा हो।
  • खाद पर खर्च कम करने के लिए:गोबर की खाद स्वयं बनाएँ, वर्मीकम्पोस्टिंग करें। मृदा परीक्षण के बाद ही संतुलित मात्रा में रासायनिक खाद डालें।
  • श्रम लागत कम करने के लिए:छोटे यंत्रों (जैसे प्याज रोपाई यंत्र) का उपयोग करें। परिवार के श्रम का सहारा लें। समय पर कार्य करके उत्पादकता बढ़ाएँ।

3. प्रश्न: प्याज की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान कौन से कीट/रोग पहुँचाते हैं और उनकी रोकथाम का आसान तरीका क्या है?
उत्तर: थ्रिप्स सबसे खतरनाक कीट है जो पत्तियों का रस चूसता है और उपज कम कर देता है। बैंगनी धब्बा रोग (Purple Blotch) एक प्रमुख रोग है।

  • आसान रोकथाम के तरीके:
    • फेरोमोन ट्रैप:थ्रिप्स के लिए नीले रंग के स्टिकी ट्रैप लगाएँ।
    • नीम का तेल:नियमित अंतराल पर नीम के तेल (5 मिली/लीटर पानी) का छिड़काव करें।
    • फसल चक्र:एक ही खेत में लगातार प्याज न लगाएँ। मक्का, मूंग, भिंडी आदि के साथ चक्र अपनाएँ।
    • साफ-सफाई:संक्रमित पौधों को तुरंत नष्ट कर दें।

4. प्रश्न: प्याज को लंबे समय तक कैसे स्टोर करें ताकि वह सड़े या अंकुरित न हो?
उत्तर: अच्छे भंडारण के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें:

  • कटाई:जब 50-70% पौधों की पत्तियाँ पीली पड़कर गिरने लगें, तभी कटाई करें।
  • सुखाना:कटाई के बाद प्याज को 7-10 दिनों तक छाया में अच्छी तरह सुखाएँ। धूप में सुखाने से छिलका जल सकता है।
  • छंटाई:सड़े, कटे-फटे और अंकुरित प्याज अलग कर दें।
  • भंडारण स्थान:ठंडी, सूखी और हवादार जगह चुनें। बाँस की टोकरियाँ या जालीदार बोरियाँ उपयोग करें ताकि हवा का प्रवाह बना रहे। प्याज को जमीन से ऊपर रखें।
  • नियमित जाँच:समय-समय पर स्टॉक की जाँच करते रहें और खराब प्याज निकालते रहें।

5. प्रश्न: प्याज की खेती के लिए कौन सा समय (मौसम) सबसे अच्छा रहता है और क्यों?
उत्तर: रबी का मौसम (अक्टूबर-नवंबर में रोपाई, मार्च-अप्रैल में कटाई) प्याज की खेती के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके कारण हैं:

  • अनुकूल मौसम:रबी में तापमान धीरे-धीरे कम होता है जो प्याज के बल्ब (कंद) के विकास के लिए आदर्श है।
  • कम रोग:इस मौसम में थ्रिप्स और बैंगनी धब्बा रोग का प्रकोप कम होता है।
  • बेहतर भंडारण क्षमता:रबी की फसल से प्राप्त प्याज की भंडारण क्षमता खरीफ की फसल की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि यह अधिक पुष्ट और सूखा होता है। इसलिए, किसान अक्सर रबी की फसल को भंडारित करके बाद में बेचते हैं।

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