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Republic Day History In India Hindi

Republic Day History In India Hindi

गणतंत्र दिवस: भारत के गौरवशाली संविधान का इतिहास और महत्व

प्रस्तावना

Republic Day History In India Hindi गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास में वह स्वर्णिम पृष्ठ है जब देश ने अपनी संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना की घोषणा की। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश पूर्ण गणतंत्र बना। यह दिन न केवल एक राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है जो देश के संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संविधान निर्माण की यात्रा

स्वतंत्रता पूर्व की तैयारियाँ

भारतीय गणतंत्र की नींव स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही पड़ने लगी थी। 1929 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ‘पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव रखा और 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया। इसी ऐतिहासिक तिथि को सम्मान देते हुए 20 वर्ष बाद भारत का संविधान लागू किया गया।

संविधान सभा का गठन

जुलाई 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ, जिसमें 389 सदस्य थे। स्वतंत्रता के बाद इसमें 299 सदस्य रह गए, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सभा का अध्यक्ष चुना गया। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी।

संविधान निर्माण की प्रक्रिया

संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए एक प्रारूप समिति गठित की गई, जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। इस समिति ने 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन में संविधान का प्रारूप तैयार किया। संविधान सभा में कुल 166 बैठकें हुईं और 11 अधिवेशन आयोजित किए गए।

संविधान की विशेषताएँ और संरचना

विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान

भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें मूल रूप से 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ और 22 भाग थे। वर्तमान में इसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियाँ और 25 भाग हैं। संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों की घोषणा की गई है।

मौलिक अधिकार और कर्तव्य

संविधान में छह मौलिक अधिकार दिए गए हैं:

  1. समानता का अधिकार
  2. स्वतंत्रता का अधिकार
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  5. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार

इसके साथ ही 11 मौलिक कर्तव्य भी निर्धारित किए गए हैं।

राज्य के नीति निर्देशक तत्व

ये तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं और सरकार के लिए नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करना है।

पहला गणतंत्र दिवस समारोह: 26 जनवरी 1950

ऐतिहासिक क्षण

26 जनवरी 1950 का दिन भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ था। सुबह 10:18 बजे भारत एक संप्रभु गणतंत्र बना। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और देश के पहले राष्ट्रपति बने। इस अवसर पर 21 तोपों की सलामी दी गई।

राजपथ पर पहली परेड

पहले गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन इर्विन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम) में किया गया था। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे। परेड में सेना की विभिन्न टुकड़ियों, बैंड और सांस्कृतिक झांकियों ने हिस्सा लिया।

गणतंत्र दिवस समारोह की परंपराएँ और प्रतीक

राजपथ पर परेड

गणतंत्र दिवस की परेड भारतीय सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन है। परेड की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ होती है। इसके बाद राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान के साथ समारोह का औपचारिक शुभारंभ होता है।

पुरस्कार वितरण

इस दिन वीरता पुरस्कार (परमवीर चक्र, अशोक चक्र आदि) और पद्म पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। ये पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले नागरिकों को दिए जाते हैं।

राज्यों की झांकियाँ

परेड में विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियाँ भारत की सांस्कृतिक विविधता, विकास योजनाओं और ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित करती हैं।

बीटिंग रिट्रीट समारोह

29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह आयोजित किया जाता है, जो गणतंत्र दिवस समारोह का समापन है। इस दिन सेना के तीनों अंगों के बैंड प्रदर्शन करते हैं।

गणतंत्र दिवस का विकास: दशकों की यात्रा

1950-1960: प्रारंभिक वर्ष

पहले दशक में समारोह सादगी से मनाया जाता था। 1955 में पहली बार राजपथ पर परेड आयोजित की गई। पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद पहले विदेशी मुख्य अतिथि थे।

1970-1980: राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक

इस दशक में गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक के रूप में उभरा। 1972 में स्वतंत्रता की रजत जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन किए गए।

1990-2000: आर्थिक उदारीकरण का युग

इस दौर में गणतंत्र दिवस समारोह में भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक पहचान को प्रदर्शित किया जाने लगा।

21वीं सदी: डिजिटल युग में गणतंत्र दिवस

आधुनिक तकनीक के साथ समारोहों का प्रसारण, सोशल मीडिया पर व्यापक कवरेज और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी इस युग की विशेषताएं हैं।

गणतंत्र दिवस का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व

राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

गणतंत्र दिवस समारोह भारत की विविधता में एकता को प्रदर्शित करता है। विभिन्न राज्यों की झांकियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और परंपराएँ देश की बहुलवादी पहचान को रेखांकित करती हैं।

संवैधानिक मूल्यों का स्मरण

यह दिन नागरिकों को संविधान में निहित मूल्यों – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का स्मरण कराता है।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

स्कूलों और कालेजों में आयोजित कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रभक्ति और संवैधानिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित करते हैं।

चुनौतियाँ और आधुनिक प्रासंगिकता

संवैधानिक मूल्यों की रक्षा

वर्तमान समय में संविधान के मूल्यों की रक्षा और उन्हें सुदृढ़ करना सबसे बड़ी चुनौती है। धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है।

डिजिटल युग में संविधान

डिजिटल प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया और सूचना क्रांति के युग में संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों की नई व्याख्या आवश्यक हो गई है।

वैश्विक संदर्भ में भारतीय गणतंत्र

वैश्वीकरण के दौर में भारतीय लोकतंत्र विश्व के लिए एक मिसाल बना हुआ है, जो विविधताओं के बावजूद सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष

गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह वह दिन है जब हम उन संवैधानिक आदर्शों को याद करते हैं जिन्होंने देश को एक सूत्र में बाँधा है। डॉ. अंबेडकर के शब्दों में, “संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन का साधन है।” गणतंत्र दिवस हमें यह प्रतिज्ञा लेने का अवसर देता है कि हम संविधान के मूल्यों का पालन करेंगे और देश के विकास में अपना योगदान देंगे।

जैसे-जैसे भारत नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, गणतंत्र दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी शक्ति हमारी एकता और संविधान में निहित है। भारत के गणतंत्र की यात्रा अभी तक पूरी नहीं हुई है – यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।


पाँच अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में क्या अंतर है?

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक है, जबकि गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) भारत के संविधान के लागू होने और देश के पूर्ण गणतंत्र बनने का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं, जबकि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति राजपथ पर झंडा फहराते हैं और परेड का आयोजन किया जाता है।

2. संविधान निर्माण में कितना समय लगा और इसे तैयार करने वाली प्रारूप समिति के सदस्य कौन थे?

संविधान निर्माण में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। अन्य सदस्यों में अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर, एन. गोपालस्वामी आयंगर, के.एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, बी.एल. मित्तर (बाद में एन. माधव राव द्वारा प्रतिस्थापित) और डी.पी. खेतान शामिल थे।

3. गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली झांकियों का चयन कैसे किया जाता है?

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली झांकियों का चयन एक विशेष समिति द्वारा किया जाता है। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा झांकियों के प्रस्ताव भेजे जाते हैं, जिनका मूल्यांकन डिजाइन, विषयवस्तु, संदेश और कलात्मक मूल्य के आधार पर किया जाता है। प्रत्येक झांकी को एक विशिष्ट थीम के इर्द-गिर्द डिजाइन किया जाता है।

4. गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसे की जाती है?

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। इसमें एनएसजी, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, दिल्ली पुलिस और सेना की विशेष इकाइयाँ शामिल होती हैं। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी जाती है। हवाई सुरक्षा के लिए एयर फोर्स की निगरानी और ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ तैनात की जाती हैं। सीसीटीवी कैमरों, मेटल डिटेक्टरों और बायोमेट्रिक सिस्टम का भी उपयोग किया जाता है।

5. गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुरस्कारों की कौन-कौन सी श्रेणियाँ हैं?

गणतंत्र दिवस के अवसर पर निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं:

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