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Loan Settlement Process: Credit Score Par Kya Asar Padega? (Full Details)

Loan Settlement Process Credit Score Par Kya Asar Padega (Full Details)

कर्ज निपटान प्रक्रिया:

क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ेगा? (पूरी जानकारी)

प्रस्तावना: कर्ज और क्रेडिट स्कोर का अनसुलझा सवाल
Loan Settlement Process: भारत में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और आसान क्रेडिट की उपलब्धता के साथ, व्यक्तिगत कर्ज (लोन) लेना आम हो गया है। होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, या क्रेडिट कार्ड – ये सभी जीवन के लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन कभी-कभी, अनचाही परिस्थितियों जैसे नौकरी छूटना, मेडिकल इमरजेंसी, या व्यवसाय में नुकसान के कारण, कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में, कई लोग कर्ज निपटान (Loan Settlement) का विकल्प चुनते हैं।

लेकिन कर्ज निपटान को लेकर सबसे बड़ी चिंता और भ्रम की स्थिति क्रेडिट स्कोर को लेकर होती है। “क्या लोन सेटलमेंट से मेरा क्रेडिट स्कोर खराब हो जाएगा?” “कितना खराब होगा?” “क्या यह असर स्थायी है?” – ये ऐसे सवाल हैं जो हर किसी के मन में होते हैं। यह लेख इन सभी सवालों का विस्तार से जवाब देगा और आपको कर्ज निपटान प्रक्रिया तथा इसके क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाले प्रभाव की पूरी जानकारी देगा।

अध्याय 1: कर्ज निपटान (Loan Settlement) क्या है? इसमें क्या होता है?

कर्ज निपटान, जिसे कभी-कभी ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (OTS) भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जहां उधारकर्ता (बॉरोअर) और ऋणदाता (लेंडर, जैसे बैंक या एनबीएफसी) इस बात पर सहमत होते हैं कि बकाया राशि (Outstanding Amount) के एक हिस्से के भुगतान पर ही कर्ज को बंद मान लिया जाएगा। यह आमतौर पर तब होता है जब उधारकर्ता लंबे समय से ईएमआई चुकाने में असमर्थ हो और बैंक को लगे कि पूरी राशि वसूलने की उम्मीद कम है।

प्रक्रिया:

  1. चूक (Default): सबसे पहले, उधारकर्ता कई ईएमआई चुकाने में चूक जाता है (आमतौर पर 90-180 दिन)।
  2. वसूली प्रयास (Recovery Attempts): बैंक कॉल, SMS, और नोटिस के माध्यम से संपर्क करता है।
  3. सेटलमेंट का प्रस्ताव (Settlement Proposal): उधारकर्ता या बैंक की तरफ से एकमुश्त कम राशि चुकाकर कर्ज बंद करने का प्रस्ताव रखा जाता है।
  4. मोलभाव (Negotiation): दोनों पक्षों के बीच बकाया राशि (जिसमें मूलधन, ब्याज, और देरी के जुर्माने शामिल हो सकते हैं) पर बातचीत होती है। बैंक मूलधन के 50% से 90% के बीच कोई राशि स्वीकार कर सकता है।
  5. सहमति पत्र (Settlement Agreement): एक बार राशि तय हो जाने पर, एक लिखित समझौता होता है। इसमें यह स्पष्ट लिखा होता है कि निर्धारित राशि के भुगतान पर लोन खाता बंद मान लिया जाएगा।
  6. भुगतान और नो-ड्यू सर्टिफिकेट (Payment & No-Due Certificate): उधारकर्ता राशि का भुगतान करता है और बैंक से “नो ड्यू सर्टिफिकेट” या “सेटलमेंट लेटर” लेता है। यह दस्तावेज़ भविष्य में बहुत जरूरी होता है।

ध्यान रखें: सेटलमेंट और लोन क्लोजर (सारी ईएमआई समय पर चुकाकर) या लोन रीस्ट्रक्चरिंग (ईएमआई कम करने के लिए कर्ज की शर्तें बदलना) में बहुत बड़ा अंतर है। सेटलमेंट में आप पूरी राशि नहीं चुकाते, इसीलिए इसका क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अध्याय 2: क्रेडिट स्कोर और सीआईबीआईएल रिपोर्ट: एक संक्षिप्त परिचय

क्रेडिट स्कोर (आमतौर पर 300 से 900 के बीच) एक तीन अंकों की संख्या है जो आपकी क्रेडिट योग्यता (उधार लेने और चुकाने की क्षमता एवं इतिहास) को दर्शाती है। इसे क्रेडिट ब्यूरो (जैसे CIBIL, Experian, Equifax) तैयार करते हैं। 750+ का स्कोर अच्छा माना जाता है।

सीआईबीआईएल रिपोर्ट में क्या दर्ज होता है?
आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में हर लोन और क्रेडिट कार्ड खाते की विस्तृत जानकारी होती है, जिसमें एक महत्वपूर्ण फील्ड है ‘अकाउंट स्टेटस’ या खाते की स्थिति। यह स्थिति कई तरह की हो सकती है, जैसे:

अध्याय 3: लोन सेटलमेंट का क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है? (दिलचस्प हिस्सा)

सीधे शब्दों में कहें तो लोन सेटलमेंट का आपके क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट इतिहास पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए इसे चरणों में समझते हैं:

1. पहला और सीधा असर: ‘सेटल्ड’ टैग

2. स्कोर में भारी गिरावट

3. भविष्य में क्रेडिट/लोन पाने में कठिनाई

4. मनोवैज्ञानिक प्रभाव (लेंडर के दृष्टिकोण से)
लोन सेटलमेंट लेंडर को यह संदेश देता है:

अध्याय 4: सेटलमेंट बनाम राइट-ऑफ बनाम डिफॉल्ट – क्या ज्यादा नुकसानदेह है?

यह समझना जरूरी है कि सभी नेगेटिव मार्क्स एक जैसे नहीं होते:

सबसे अच्छा विकल्प (हमेशा): लोन रीस्ट्रक्चरिंग। अगर आप वित्तीय कठिनाई में हैं, तो सबसे पहले बैंक से लोन रीस्ट्रक्चरिंग के बारे में बात करें। इसमें आपकी ईएमआई कम की जा सकती है या कर्ज की अवधि बढ़ाई जा सकती है। इससे आपका खाता ‘करंट’ बना रहता है और क्रेडिट स्कोर पर उतना बुरा असर नहीं पड़ता।

अध्याय 5: क्या सेटलमेंट के बाद क्रेडिट स्कोर फिर से अच्छा हो सकता है? (रिकवरी प्लान)

हां, लोन सेटलमेंट एक वित्तीय झटका है, लेकिन यह अंत नहीं है। समय, अनुशासन और सही रणनीति से आप अपना क्रेडिट स्कोर दोबारा बना सकते हैं। यह प्रक्रिया धीमी होती है, लेकिन संभव है।

रिकवरी के चरण:

  1. नो-ड्यू सर्टिफिकेट सुरक्षित रखें: सेटलमेंट के बाद मिला लिखित समझौता और नो-ड्यू सर्टिफिकेट हमेशा सुरक्षित रखें। भविष्य में किसी विवाद या सत्यापन के लिए यह जरूरी है।
  2. अन्य सभी खातों को समय पर चुकाएं: अगर आपके पास अन्य लोन या क्रेडिट कार्ड हैं, तो उनकी हर ईएमआई या बिल का भुगतान हर महीने समय पर पूरी राशि चुकाकर करें। यह नया सकारात्मक इतिहास बनाने का सबसे कारगर तरीका है।
  3. सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लें: जब आपका स्कोर कम हो, तो आम क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेंगे। इस स्थिति में, सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड (Fixed Deposit के बदले मिलने वाला कार्ड) ले सकते हैं। इसका उपयोग करके और बिल समय पर चुकाकर आप अपना क्रेडिट इतिहास दोबारा बना सकते हैं।
  4. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कम रखें: क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय, अपने क्रेडिट लिमिट का 30% से कम ही इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखें। ज्यादा इस्तेमाल नेगेटिव माना जाता है।
  5. क्रेडिट रिपोर्ट की नियमित जांच करें: साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट (CIBIL, Experian आदि) फ्री में चेक करें। सुनिश्चित करें कि सेटल्ड अकाउंट की जानकारी सही तरीके से दर्ज हुई है। कभी-कभी गलतियाँ हो सकती हैं।
  6. समय सबसे बड़ा इलाज है: ‘सेटल्ड’ टैग का असर 7 साल बाद आपकी रिपोर्ट से हट जाएगा। इस दौरान अगर आपका बाकी का क्रेडिट व्यवहार बिल्कुल साफ रहा, तो धीरे-धीरे स्कोर सुधरने लगेगा। 2-3 साल में आप महत्वपूर्ण सुधार देख सकते हैं।

अध्याय 6: महत्वपूर्ण सावधानियाँ और विकल्प

निष्कर्ष

लोन सेटलमेंट एक दोधारी तलवार है। एक तरफ यह आपको एक बड़े वित्तीय बोझ से तत्काल राहत दिलाता है, लेकिन दूसरी तरफ, यह आपके क्रेडिट स्कोर को लंबे समय के लिए गंभीर नुकसान पहुंचाता है, जिससे भविष्य में वित्तीय उत्पाद लेना मुश्किल और महंगा हो जाता है। निर्णय लेने से पहले, सभी विकल्पों (विशेषकर लोन रीस्ट्रक्चरिंग) पर विचार करें और किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। अगर सेटलमेंट ही एकमात्र रास्ता है, तो उसके बाद एक अनुशासित वित्तीय जीवनशैली अपनाकर और सही रणनीति से धैर्यपूर्वक अपने क्रेडिट स्कोर को फिर से बनाने का प्रयास करें। याद रखें, क्रेडिट स्कोर एक मैराथन है, न कि स्प्रिंट। इसकी मरम्मत में समय लगता है।


लोन सेटलमेंट और क्रेडिट स्कोर पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या लोन सेटलमेंट के बाद मुझे फिर से कोई लोन कभी मिल पाएगा?

हां, मिल सकता है, लेकिन तुरंत नहीं। सेटलमेंट के बाद कम से कम 2-3 साल तक नया अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड) मिलना बहुत मुश्किल होगा। इस अवधि के बाद, अगर आपने अपना क्रेडिट इतिहास सुधार लिया है (समय पर बिल भरकर), तो आप सेक्योर्ड लोन (जैसे FD बैक्ड लोन) या उच्च ब्याज दर पर कुछ लोन प्राप्त कर सकते हैं। होम लोन जैसे बड़े लोन के लिए और भी लंबा इंतजार और बेहतर इतिहास चाहिए होगा।

2. क्रेडिट रिपोर्ट पर ‘सेटल्ड’ टैग कितने साल तक रहता है?

लोन सेटलमेंट की सूचना आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर खाता बंद होने की तारीख से 7 वर्षों तक रहती है। इस अवधि के बाद यह स्वत: हट जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि इस 7 साल की अवधि में आप बाकी सभी क्रेडिट भुगतान समय पर करें।

3. क्या सेटलमेंट से बेहतर है कि मैं लोन डिफॉल्ट कर दूं?

नहीं, डिफॉल्ट करना कभी भी बेहतर विकल्प नहीं है। डिफॉल्ट (लगातार भुगतान न करना) भी आपके स्कोर को उतना ही या अधिक नुकसान पहुंचाता है, और बैंक कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। सेटलमेंट में कम से कम आप बैंक के साथ एक समझौता करके मामला बंद करते हैं और कुछ राशि वापस करते हैं, जो डिफॉल्ट से थोड़ा बेहतर है।

4. क्या सेटलमेंट के बाद भी बैंक मुझे परेशान कर सकता है?

अगर सेटलमेंट पूरी तरह से लिखित समझौते के आधार पर हुआ है और आपने निर्धारित एकमुश्त राशि का भुगतान कर दिया है, तो बैंक आपको परेशान नहीं कर सकता। नो-ड्यू सर्टिफिकेट या सेटलमेंट लेटर यह साबित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है कि आपका बैंक के साथ कोई बकाया नहीं है। इसे सुरक्षित रखें।

5. क्या सेटलमेंट की वजह से मुझे टैक्स देना पड़ेगा?

हो सकता है। आयकर अधिनियम के अनुसार, बैंक द्वारा माफ की गई कर्ज की राशि (जो आपने नहीं चुकाई) को “आय” के रूप में माना जा सकता है। इसे ‘रिमिशन ऑफ डेट’ कहते हैं। इस माफ की गई राशि पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) के तहत टैक्स देना पड़ सकता है। सेटलमेंट से पहले किसी कर सलाहकार से इस बारे में सलाह लेना बुद्धिमानी होगी।


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