G20 क्या है? पूरी जानकारी, उद्देश्य, देशों की सूची और भारत की भूमिका
प्रस्तावना: वैश्विक शासन की धुरी
G20 Kya Hai? Full Form, Countries List, Uddeshya & Bharat Ki Bhumika 21वीं सदी में जब दुनिया आर्थिक एकीकरण, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी क्रांति और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के जटिल दौर से गुजर रही है, तब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। ऐसे मेंG20 (Group of Twenty)वैश्विक आर्थिक सहयोग का सबसे प्रमुख मंच उभरकर सामने आया है।
यह मंच दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं को एक मेज पर लाता है, जहाँ वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा और उनके समाधान के लिए रोडमैप तैयार किया जाता है। भारत ने 2023 में G20 की अध्यक्षता संभालकर इस मंच को नई दिशा दी और “वसुधैव कुटुम्बकम” (दुनिया एक परिवार है) के दर्शन को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में लाया। यह लेख G20 के गठन, उद्देश्य, सदस्य देशों, संरचना, भारत की भूमिका और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत प्रकाश डालता है।
भाग 1: G20 क्या है? पूर्ण रूप और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
G20 का पूर्ण रूप “Group of Twenty” है, जिसे हिंदी में “बीस का समूह” कहा जाता है। यह 19 देशों और यूरोपीय संघ (EU) का एक महत्वपूर्ण अंतरसरकारी मंच है। इसके सदस्य वैश्विक स्तर पर आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से सर्वाधिक प्रभावशाली माने जाते हैं।
गठन और विकास:
G20 का जन्म 1999 के एशियाई वित्तीय संकट की प्रतिक्रिया में हुआ था। उस समय, यह स्पष्ट हो गया था कि केवल विकसित देशों के समूह G7 वैश्विक आर्थिक मुद्दों को संभालने के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्वशील नहीं है। विशेष रूप से उभरते हुए बाजारों (जैसे भारत, चीन, ब्राजील) की आवाज को शामिल करने की आवश्यकता महसूस हुई। इस प्रकार, G7 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की एक बैठक में G20 के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
शुरुआत में, यह मंच केवलवित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरोंके स्तर पर मिलता था। इसका उद्देश्य वैश्विक वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना और आर्थिक नीतियों में समन्वय स्थापित करना था।
महत्वपूर्ण मोड़: 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट
2008 में आए भयानक वित्तीय संकट ने G20 के महत्व और भूमिका में अभूतपूर्व वृद्धि की। इस संकट से निपटने के लिए,तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुशने पहली बार G20 केराष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलनका आयोजन किया। नवंबर 2008 में वाशिंगटन डीसी में हुआ यह पहला शिखर सम्मेलन, G20 को दुनिया का प्रमुखआर्थिक सहयोग मंचबना दिया। तब से, हर साल (कोविड के दौरान वर्चुअल को छोड़कर) सदस्य देशों के नेता शिखर सम्मेलन में भाग लेते हैं।
भाग 2: G20 के सदस्य देशों की सूची और उनका महत्व
G20 में कुल 20 सदस्य हैं, जिनमें 19 स्वतंत्र राष्ट्र और 1 संगठन (यूरोपीय संघ) शामिल है। इन देशों का चयन उनकी आर्थिक क्षमता, जनसंख्या, क्षेत्रीय प्रभाव और विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान के आधार पर किया गया है।
G20 के 20 सदस्य निम्नलिखित हैं:
- अर्जेंटीना(दक्षिण अमेरिका का प्रतिनिधि)
- ऑस्ट्रेलिया(ओशिनिया क्षेत्र का प्रतिनिधि)
- ब्राजील(लैटिन अमेरिका की प्रमुख अर्थव्यवस्था)
- कनाडा(विकसित अर्थव्यवस्था, G7 सदस्य)
- चीन(दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था)
- फ्रांस(विकसित अर्थव्यवस्था, G7 सदस्य)
- जर्मनी(यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, G7 सदस्य)
- भारत(दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था)
- इंडोनेशिया(दक्षिणपूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था)
- इटली(विकसित अर्थव्यवस्था, G7 सदस्य)
- जापान(एशिया की विकसित अर्थव्यवस्था, G7 सदस्य)
- मेक्सिको(उत्तरी अमेरिका की उभरती अर्थव्यवस्था)
- रूस(प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न प्रमुख अर्थव्यवस्था)
- सऊदी अरब(मध्य पूर्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था और तेल निर्यातक)
- दक्षिण अफ्रीका(अफ्रीका महाद्वीप का एकमात्र प्रतिनिधि)
- दक्षिण कोरिया(एशिया की उन्नत तकनीकी अर्थव्यवस्था)
- तुर्की(यूरोप और एशिया के बीच सेतु)
- यूनाइटेड किंगडम(विकसित अर्थव्यवस्था, G7 सदस्य)
- यूनाइटेड स्टेट्स(दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था)
- यूरोपीय संघ(27 यूरोपीय देशों का राजनीतिक-आर्थिक संघ)
आमंत्रित अतिथि देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन:
G20 अपने शिखर सम्मेलनों में क्षेत्रीय संगठनों और अन्य देशों को भी आमंत्रित करता है, ताकि चर्चा अधिक समावेशी बने। इनमें शामिल हैं:
- देश:स्पेन (स्थायी अतिथि), सिंगापुर, नीदरलैंड्स, बांग्लादेश, मिस्र, मॉरिशस, नाइजीरिया, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात आदि।
- अंतरराष्ट्रीय संगठन:संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) आदि।
महत्व:
- वैश्विक जनसंख्या:G20 देश दुनिया की लगभगदो-तिहाई आबादीका प्रतिनिधित्व करते हैं।
- वैश्विक व्यापार:दुनिया का75% से अधिक अंतरराष्ट्रीय व्यापारइन्हीं देशों के बीच होता है।
- वैश्विक निवेश:ये देश विश्व के80% से ज्यादा निवेशके लिए जिम्मेदार हैं।
इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि G20 की नीतियाँ और निर्णय पूरी मानवता के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं।
भाग 3: G20 के उद्देश्य और कार्यप्रणाली
प्रमुख उद्देश्य:
- वैश्विक आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को बढ़ावा देना:यह G20 का मूल उद्देश्य है। आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर समन्वय स्थापित करना।
- अंतरराष्ट्रीय वित्तीय वास्तुकला को मजबूत करना:वित्तीय बाजारों के नियमन, कर चोरी रोकथाम और वित्तीय संकटों से निपटने के लिए मानक तैयार करना।
- वैश्विक चुनौतियों का समाधान ढूंढना:जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य संकट (जैसे कोविड-19), आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक, और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना।
- अंतरराष्ट्रीय कराधान में सुधार:बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए न्यूनतम वैश्विक कॉर्पोरेट कर (जैसे OECD के ढांचे) जैसे सुधारों पर सहमति बनाना।
- विकास और अवसंरचना:विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीका, में बुनियादी ढाँचे के विकास और वित्तपोषण को बढ़ावा देना।
कार्यप्रणाली और संरचना:
G20 एक स्थायी सचिवालय नहीं है। इसकी अध्यक्षता हर साल एक अलग सदस्य देश के पास रोटेशन के आधार पर होती है। अध्यक्ष देश ही उस वर्ष के एजेंडे को निर्धारित करता है और बैठकों की मेजबानी करता है।
G20 की प्रक्रिया तीन प्रमुख ट्रैक में चलती है:
- शेरपा ट्रैक (Sherpa Track):यह मुख्य चर्चा मंच है। प्रत्येक देश का एक ‘शेरपा’ (आमतौर पर एक वरिष्ठ राजनयिक या सलाहकार) होता है, जो नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए विभिन्न कार्य समूहों (वित्त, व्यापार, ऊर्जा, कृषि, पर्यावरण, डिजिटल अर्थव्यवस्था आदि) में चर्चा करता है। यह ट्रैक नीतिगत मसौदे तैयार करता है।
- वित्त ट्रैक (Finance Track):इसमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल होते हैं। यह ट्रैक मौद्रिक नीति, वित्तीय नियमन, अंतरराष्ट्रीय कराधान जैसे तकनीकी आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
- एंगेजमेंट ग्रुप (Engagement Groups):ये गैर-सरकारी हितधारकों के समूह हैं जो सरकारों को सिफारिशें प्रस्तुत करते हैं। इनमें बिजनेस 20 (B20), सिविल 20 (C20), लेबर 20 (L20), साइंस 20 (S20), थिंक 20 (T20), यूथ 20 (Y20), वूमेन 20 (W20) आदि शामिल हैं। यह G20 को जमीनी स्तर से जोड़ते हैं।
इन सभी ट्रैकों के परिणामस्वरूप तैयार दस्तावेजों और सिफारिशों को अंत में नेताओं के शिखर सम्मेलन में पेश किया जाता है, जहाँ अंतिम सम्मेलन विज्ञप्ति (Leaders’ Declaration) जारी की जाती है। यह विज्ञप्ति सदस्य देशों के बीच राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक होती है, हालाँकि यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती।
भाग 4: भारत की भूमिका: विकासशील दुनिया की आवाज से वैश्विक नेतृत्व तक
भारत G20 के संस्थापक सदस्यों में से एक है और इस मंच पर उसकी भूमिका लगातार विस्तारित और प्रभावशाली होती गई है। भारत ने G20 को केवल आर्थिक मुद्दों के मंच से आगे बढ़ाकर विकास, स्थिरता और समावेशिता के व्यापक एजेंडे के प्रवर्तक के रूप में स्थापित किया है।
1. G20 अध्यक्ष के रूप में भारत (2023): एक ऐतिहासिक पदभार
भारत ने 1 दिसंबर, 2022 से 30 नवंबर, 2023 तक G20 की अध्यक्षता संभाली। “वसुधैव कुटुम्बकम” या “One Earth, One Family, One Future” को थीम रखते हुए भारत ने निम्नलिखित प्रमुख प्राथमिकताएँ तय कीं:
- हरित विकास और जलवायु वित्त:जलवायु कार्रवाई को विकास के एजेंडे के साथ जोड़ना और विकासशील देशों के लिए वित्त और तकनीक हस्तांतरण सुनिश्चित करना।
- एकीकृत और समावेशी विकास:स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और लैंगिक समानता पर ध्यान केंद्रित करना।
- तकनीकी परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना:भारत के डिजिटल सफलता मॉडल (जैसे UPI, Aadhaar) को वैश्विक स्तर पर साझा करना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को बढ़ावा देना।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज:विकासशील और कम विकसित देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं को मुख्यधारा के वैश्विक एजेंडे में शामिल करना। इसके लिए भारत ने“वैश्विक दक्षिण की आवाज” शिखर सम्मेलनभी आयोजित किया।
- बहुवचन और सुधारित बहुपक्षवाद:अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (जैसे UN) में सुधार की वकालत करना ताकि वे 21वीं सदी की वास्तविकताओं को दर्शा सकें।
2. प्रमुख उपलब्धियाँ और विरासत:
- अफ्रीकी संघ का G20 में स्थायी सदस्यता:भारत की अध्यक्षता में हुए नई दिल्ली शिखर सम्मेलन (2023) की सबसे बड़ी उपलब्धिअफ्रीकी संघ (African Union)को G20 का पूर्ण सदस्य बनाना था। इससे मंच की प्रतिनिधित्वशीलता और विविधता में ऐतिहासिक वृद्धि हुई।
- नई दिल्ली नेतृत्व विज्ञप्ति:भूराजनीतिक मतभेदों (यूक्रेन संकट) के बावजूद भारत की कूटनीतिक क्षमता से सभी सदस्यों की सहमति से विज्ञप्ति जारी करवाना एक बड़ी सफलता थी।
- ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस की शुरुआत:जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक पहल।
- इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC):व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा।
- DPI फ्रेमवर्क पर सहमति:डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास और साझाकरण पर ढाँचा तैयार करना।
3. एक सक्रिय और प्रभावशाली सदस्य के रूप में:
अध्यक्षता से पहले और बाद में भी भारत ने G20 में सक्रिय भूमिका निभाई है:
- विकास एजेंडा को आगे बढ़ाना:भारत हमेशा विकासशील देशों के हितों, जलवायु न्याय और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की वकालत करता रहा है।
- कर चोरी रोकथाम:Base Erosion and Profit Shifting (BEPS) जैसे वैश्विक कर सुधारों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
- आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश:आतंकवाद को वैश्विक चुनौती बताते हुए इसके खिलाफ कार्रवाई की माँग करता रहा है।
संक्षेप में, भारत G20 में न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को प्रभावी ढंग से रखता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रवक्ता बनकर वैश्विक शासन को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाने का प्रयास करता है।
भाग 5: चुनौतियाँ, आलोचनाएँ और भविष्य की राह
G20 की सफलताओं के बावजूद, यह मंच कई चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना करता है:
- कार्यान्वयन का अभाव:नेताओं की घोषणाएँ अक्सर जुमले बनकर रह जाती हैं। इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने में सदस्य देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी देखी जाती है।
- भू-राजनीतिक विभाजन:यूक्रेन युद्ध, ताइवान जलडमरूमध्य, दक्षिण चीन सागर जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद G20 की सामूहिक कार्रवाई की क्षमता को कमजोर करते हैं।
- प्रतिनिधित्व का संकट:अफ्रीकी संघ के शामिल होने के बाद भी, अफ्रीका के केवल एक देश (द. अफ्रीका) पूर्ण सदस्य है। इसी तरह, दक्षिण एशिया (भारत के अलावा), कैरिबियन और प्रशांत द्वीप समूह के देशों का प्रतिनिधित्व नहीं है।
- नौकरशाही और जटिलता:G20 की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। सैकड़ों बैठकों और दस्तावेजों के बावजूद, ठोस परिणाम सीमित ही नजर आते हैं।
- पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी:G20 एक अनौपचारिक मंच है, जो खुद को किसी भी बाहरी निगरानी या जनता के प्रति जवाबदेह नहीं मानता। इसके निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी आलोचना का विषय रही है।
भविष्य की दिशा:
भविष्य में G20 की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं:
- कार्यान्वयन तंत्र मजबूत करना:घोषणाओं को कार्यरूप देने के लिए एक अनुवर्ती और समीक्षा तंत्र विकसित करना।
- अधिक समावेशिता:और अधिक क्षेत्रीय संगठनों को संवाद में शामिल करना।
- नई चुनौतियों पर ध्यान:articificial intelligence का विनियमन, साइबर सुरक्षा, भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी, और खाद्य सुरक्षा जैसे उभरते मुद्दों पर कार्य योजना बनाना।
- G20 और UN के बीच तालमेल:G20 के निर्णयों को संयुक्त राष्ट्र जैसे सार्वभौमिक संगठनों के माध्यम से लागू करवाने का प्रयास करना।
निष्कर्ष
G20 आज की बहुध्रुवीय दुनिया में सहयोग और वार्ता का एक अनिवार्य मंच है। यह दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हालाँकि यह पूर्ण नहीं है और इसमें कमियाँ हैं, लेकिन वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए इससे बेहतर कोई अन्य मंच फिलहाल मौजूद नहीं है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान यह साबित किया कि यह मंच केवल आर्थिक आँकड़ों पर चर्चा तक सीमित नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित विकास और वैश्विक एकजुटता का प्रतीक भी बन सकता है। G20 का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कितना लचीला, समावेशी और कार्योन्मुख बन पाता है। जैसा कि भारत ने दिखाया, “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना ही इसके सतत और न्यायसंगत भविष्य की कुंजी है।
G20 के बारे में 5 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. G20 और G7 में क्या अंतर है?
G7 (Group of Seven) केवल 7 विकसित देशों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, UK, USA) का समूह है, जो मुख्य रूप से राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित है। G20 में G7 के देशों के अलावा भारत, चीन, ब्राजील जैसे प्रमुख विकासशील देश भी शामिल हैं, जिससे यह अधिक प्रतिनिधित्वशील और आर्थिक रूप से शक्तिशाली मंच है। 2008 के बाद से G20 ने वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर G7 की प्रमुख भूमिका ले ली है।
2. क्या G20 के निर्णय सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होते हैं?
नहीं, G20 के निर्णय या नेताओं की विज्ञप्ति कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती। ये सदस्य देशों के बीच राजनीतिक प्रतिबद्धता और सहमति को दर्शाते हैं। इन्हें लागू करना प्रत्येक देश की अपनी इच्छा और राष्ट्रीय कानूनों पर निर्भर करता है। हालाँकि, G20 के दबाव और सहमति से अंतरराष्ट्रीय मानक (जैसे कर संबंधी) बनते हैं, जिन्हें अन्य संगठनों (जैसे OECD) के माध्यम से लागू किया जा सकता है।
3. G20 की अध्यक्षता कैसे तय होती है?
G20 की अध्यक्षता एक रोटेशनल सिस्टम के तहत तय होती है। हर साल एक अलग सदस्य देश अध्यक्ष बनता है। रोटेशन क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाता है। अध्यक्ष देश ही उस वर्ष के एजेंडे, बैठकों के स्थल और थीम को निर्धारित करता है। भारत ने 2023 में, ब्राजील 2024 में और दक्षिण अफ्रीका 2025 में अध्यक्षता कर रहा है/करेगा।
4. G20 शिखर सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा होती है?
शुरुआत में केवल आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहने वाला G20 अब एक व्यापक मंच बन गया है। इसमें निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:
- आर्थिक:वैश्विक विकास, व्यापार, निवेश, कराधान, वित्तीय नियमन।
- सामाजिक एवं विकास:स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन।
- पर्यावरण एवं ऊर्जा:जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा, जैव विविधता, सतत विकास लक्ष्य (SDG)।
- राजनीतिक एवं सुरक्षा:आतंकवाद का वित्तपोषण, साइबर सुरक्षा, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा।
- तकनीकी:डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना।
5. भारत की G20 अध्यक्षता की सबसे बड़ी विरासत क्या है?
भारत की G20 अध्यक्षता की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक विरासत अफ्रीकी संघ (African Union) को G20 का पूर्ण सदस्य बनाना है। इस एक कदम ने मंच की प्रतिनिधित्वशीलता में क्रांतिकारी बदलाव किया और वैश्विक दक्षिण को एक मजबूत आवाज दी। इसके अलावा, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के दर्शन को केंद्र में रखकर मानव-केंद्रित वैश्विक शासन पर बल देना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) जैसे नए एजेंडे को आगे बढ़ाना भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हैं।
